राष्ट्रीय परीक्षण शाला (रापशा), जो कि पूर्व में गवर्मेंट टेस्ट हाउस के रूप में जाना जाता था, वर्षों पहले रेलवे बोर्ड द्वारा कलकत्ता में सन् 1912 में स्थापित किया गया था । उद्देश्य था आयात प्रतिस्थापन द्वारा भारतीय रेल की जरूरतों को पूरा करना। 1916-1918 के दौरान भारतीय औद्योगिक आयोग ने एक भारतीय स्टोर विभाग के लिए सिफारिश की और एक भारतीय स्टोर विभाग की स्थापना होने पर रापशा को उस विभाग में समाहृत कर लिया गया। एक लंबी अवधि के लिए रक्षा विभाग सहित सरकारी विभागों द्वारा जरूरी जनरल स्टोर के नियमित परीक्षण के लिए रापशा काम करती रही। सन् 1934 में स्वदेशी विकास के साथ जुड़ी कच्चे मालों की समस्याओं पर शोध के संचालन के लिए आधुनिक सीएसआईआर का मूल इन्ड्रस्टियल और रिसर्च ब्यूरो, बाद में औद्योगिक अनुसंधान ब्यूरो के रुप में नामित की भारत सरकार द्वारा गठन किया गया था और रापशा में पाला गया।
इस प्रकार रापशा ने एक लंबी यात्रा तय करने के पश्चात भारतीय उद्योगों के परिदृश्य में अपने महत्व को स्थापित किया है। आजादी के बाद से रापशा की जिम्मेदारियों कई गुना बढ़ गई। यह सक्रिय रूप से प्रौद्योगिकी के सभी पहलुओं उद्योग, वाणिज्य, व्यापार, आयात प्रतिस्थापन, निर्यात संवर्धन और मानकीकरण के साथ जुड़ गई। रापशा मानकीकरण और राष्ट्रीय मानकों के निर्माण में एक सक्रिय भागीदार रही है और 1947 के बाद स्थापित भारतीय मानक संस्थान, वर्तमान में भारतीय मानक ब्यूरो, की सहायता के लिए रापशा को विशेष गर्व है। रापशा इस देश में परीक्षण और अंशांकन प्रयोगशाला मान्यता बोर्ड (एनएबीएल) के साथ सक्रिय रूप से जुड़ी है।
लंबे समय से इस विशाल भारतीय उपमहाद्वीप में विस्तृत उद्योगों की आवश्यकताओं को महसूस करते हुए देश के विभिन्न हिस्सों में क्षेत्रीय परीक्षण शालाओं को खोलने की योजना बनाई गई और रापशा अब देश में छः क्षेत्रीय यथा, पूर्वी, पश्चिमी, दक्षिणी, उत्तरी, उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व के स्थित प्रयोगशालाओं से कार्यरत है। रापशा के वर्तमान विकास की स्थिति से जुड़ी कालानुक्रमिक घटनाएं नीचे वर्णित हैं।


1912

तत्कालीन रेलवे बोर्ड के अधीन रेलवे द्वारा स्वदेशी उत्पादकों द्वारा निर्मित सामानों की जांच के लिए कोलकाता में स्थापित ।

1922

औद्योगिक समिति की संस्तुति पर इंडियन स्टोर्स डिपार्टमेंट में समाविष्ट किया गया ।

1934

औद्योगिक खुफिया और अनुसंधान ब्युरों का (बाद में औद्योगिक अनुसंधान ब्यूरों का नाम दिया गया) स्वदेशी कच्चे माल के संसाधनों के साथ जुड़ी समस्याओं पर अनुसंधान के लिए रापशा में सृजन किया।

1935

सूचना विभाग की तरफ से रापशा ने रोड टेस्ट ट्रैक संयोजित किया गया ।

1940

राष्ट्रीय परीक्षण शाला के अनुसंधान विभाग को डायरेक्ट ऑफ साइंटिफिक एंड इन्डस्ट्रियल रिसर्च के प्रशासनिक नियंत्रण में स्थानांतरित किया गया जो रापशा में ही स्थित थी ।

1948

रापशा के आधुनिकीकरण के लिए भारत सरकार द्वारा एक पुनर्गठन समिति तैयार की गई।

1949

पुनर्गठन समिति की संस्तुति पर भारत सरकार द्वारा रापशा की सलाहकार समिति में प्रमुख वैज्ञानिकों एवम् उद्योगपतियों को नामित किया गया ।

1956

रापशा के भवन निर्माण का दूसरा चरण पूरा हुआ । साथ ही पुनर्गठन समिति की संस्तुति के आधार पर वैज्ञानिकों, कार्मिकों तथा आधुनिक उपकरणों के संपूर्ण विकास एवं विस्तार का कार्य संपादित किया गया ।

1964

स्वर्ण जयंती समारोह मनाया गया तथा रापशा की मुम्बई शाखा का प्रारंभ ।

1965

भारत सरकार द्वारा वैज्ञानिक कार्मिकों के कार्य करने के तरीके तथा संगठनात्मक ढांचे का पूर्ण अध्ययन करने के लिए एक अध्ययन समिति का गठन किया गया। संस्था की क्षमता के स्तर को बढ़ाने के लिए अध्ययन दल द्वारा महत्वपूर्ण सिफारिशें की गई ।

1972

हीरक जयन्ती समारोह का आयोजन ।

1975

रा.प.शा. की चेन्नई (तत्कालीन मद्रास) शाखा का प्रारंभ ।

1977

रापशा की गाजियाबाद शाखा का शुभारंभ ।

1981

मद्रास स्थित रा.प.शा. की शाखा, तारामणि स्थित भवन में स्थानांतरित ।

1982

रापशा की 70वीं वर्षगांठ का पालन ।

1983

रापशा की मुंबई (तत्कालीन बंबई) शाखा अपने मारोल स्थित भवन में स्थानांतरित ।

1984

एस.ए.सी.सी. (साक) द्वारा गठित वैलुरी समिति के द्वारा रापशा को प्रमुख वैज्ञानिक संगठन के रुप में मान्यता ।

1985

महानिदेशक कार्यालय ने रापशा, कोलकाता के भवन में मुख्यालय के रुप में कार्य करना प्रारंभ किया ।

1986

रापशा की गाजियाबाद शाखा का, कमला नेहरु नगर अपने भवन में स्थानांतरण ।

1993

रापशा, गाजियाबाद की हाई-वोल्टेज प्रयोगशाला का उद्घाटन ।

1994

जयपुर शाखा का शुभारंभ ।
रापशा, कोलकाता में कंप्यूटराइज्ड मैंनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम का उद्घाटन ।

1996

गुवाहाटी शाखा का प्रारंभ ।

2000

रापशा ने साल्ट लेक कोलकाता के प्रयोगशाला कॉम्प्लेक्स के मैट्रोलॉजी एंड कैलिब्रेशन ब्लॉक और हैवी मैटिरियल टेस्टिंग ब्लॉक को अपने अधिकार क्षेत्र में लिया गया तथा आंशिक रुप से कार्य करना शुरू किया ।

2003

रापशा, साल्ट लेक, कोलकाता के नए भवन का उद्घाटन।

2005

रापशा, जयपुर में नए भवन का उद्घाटन।

2012

रापशा, चेन्नई में शताब्दी भवन का उद्घाटन।

2013

भारत के महामहिम राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी की गरिमामय उपस्थिति में शताब्दी समारोह का पालन।

रापशा का शताब्दी समारोह भारत के महामहिम राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी के गरिमामय उपस्थिति में 20 वीं जनवरी 2013 को मनाया गया। कोलकाता के ऐतिहासिक टाउन हॉल में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस अवसर पर अन्य गणमान्य व्यक्तियों और व्यक्तित्व में उपस्थित थे पश्चिम बंगाल के माननीय राज्यपाल श्री एम.के. नारायणन, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के तत्कालीन माननीय केन्द्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार के साथ), प्रो. के वी थॉमस, उपभोक्ता मामले, पश्चिम बंगाल के माननीय मंत्री श्री साधन पांडे, और परमाणु ऊर्जा विभाग, भारत सरकार के प्रख्यात वैज्ञानिक होमी भाभा प्रोफेसर, प्रो. विकास सिन्हा, और अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण। इस अवसर पर पश्चिम बंगाल के माननीय राज्यपाल श्री एम.के. नारायणन द्वारा “History of National Test House Origin of Scientific and Industrial Research in India” शीर्षक पुस्तक का लोकार्पण किया गया एवं इसकी पहली प्रति भारत के महामहिम राष्ट्रपति को प्रस्तुत किया गया ।

2016

रापशा, गुवाहाटी के नए भवन का उद्घाटन।

 
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